आई ऋतु बसंत की
पीले-पीले सरसों के फूल, पीली उड़े पतंग
रंग बरसे पीला और छाए बसंत उमंग
( Patiala 23rd January Navneet Bansal News Room 7) भारत में ऋतुओं का परिवर्तन न केवल प्रकृति में बदलाव लाता है, बल्कि हमारे जीवन में नई उमंग और उत्साह भी भर देता है। बसंत पंचमी हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। यह त्योहार कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति के पुनर्जन्म और सौंदर्य का प्रतीक है।*बसंत पंचमी का महत्व*
बसंत पंचमी को मुख्य रूप से विद्या और कला की देवी माँ सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि में ध्वनि और ज्ञान के संचार के लिए देवी सरस्वती का आह्वान किया था।
*प्रकृति का श्रृंगार*
इस समय प्रकृति अपना स्वरूप बदलती है। खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं, पेड़ों पर नई कोपलें आने लगती हैं और आम के पेड़ों पर बौर (मंजर) आने शुरू हो जाते हैं। वातावरण न तो अधिक ठंडा होता है और न ही अधिक गर्म।
*विद्या और संगीत का पर्व*
विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए यह दिन अत्यंत विशेष है। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। लोग अपनी कलम, पुस्तकें और वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं ताकि उन्हें बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
*पीले रंग का विशेष महत्व*
इस त्योहार में पीला रंग प्रधान होता है। पीला रंग ऊर्जा, प्रकाश और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
लोग पीले वस्त्र पहनते हैं।
पीले पकवान जैसे कि मीठे चावल (केसरिया भात) और पीले लड्डू बनाए जाते हैं। माता सरस्वती को पीले फूल अर्पित किए जाते हैं।
*उत्सव की परंपराएँ*
पतंगबाजी: पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में इस दिन आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। लोग छतों पर इकट्ठा होकर ‘पेच’ लड़ाते हैं।
*अक्षर अभ्यास*
छोटे बच्चों के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। कई परिवारों में बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना इसी दिन सिखाया जाता है, जिसे ‘विद्यारंभ’ संस्कार कहा जाता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम: संगीत और नृत्य की मंडलियां इस दिन विशेष प्रस्तुतियां देती हैं।
बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस तरह प्रकृति पुराने पत्तों को त्याग कर नए रूप में निखरती है, हमें भी अपने भीतर की जड़ता को त्याग कर नए विचारों और ऊर्जा को अपनाना चाहिये !
हमारे News Room 7 के सभी subscribers और पाठकों को बसंत पंचमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं
नवनीत बंसल
पटियाला
