*वंदे मातरम का इतिहास*
वंदे मातरम् भारत का एक अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक गीत है। जो देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रतीक माना जाता है। वंदे मातरम् के रचनाकार श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी थे जो उन्होंने 1870 के दशक में लिखा था व यह पहली बार प्रकाशित हुआ 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में. वंदे मातरम को पहली बार 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था. “वंदे मातरम्” संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में लिखा गया है। इसका अर्थ है —”मैं मातृभूमि की वंदना करता हूँ”।
🇮🇳 यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणास्रोत बना। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह जन-जन का नारा बन गया।अनेक सभाओं, आंदोलनों और जुलूसों में इसे गर्व के साथ गाया जाता था। वंदे मातरम् भारत का एक अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक गीत है, जो देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रतीक माना जाता है।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने “वंदे मातरम्” को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया। भारत का राष्ट्रीय गान “जन गण मन” है, जबकि “वंदे मातरम्” को समान आदर प्राप्त है। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, त्याग, बलिदान और समर्पण की भावना का प्रतीक है। आज 26 जनवरी, 2026 के 150 वर्ष होने के उपलक्ष्य में गणतंत्र दिवस की परेड का “वंदे मातरम” मुख्य गीत रहा !
Newsroom 7 के सभी सब्सक्राइबर्स एवं पाठकों को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाईयां एवं शुभकामनाएं !!
जय हिंद ! वंदे मातरम !!
नवनीत बंसल
पटियाला
