अजित पवार थे महाराष्ट्र की जनता के भरोसेमंद “दादा”
(Patiala 28 January Navneet Bansal) वर्तमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे श्री अजीत पवार की आज एक प्लेन दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया। श्री अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले की राहुरी तालुका स्थित देवलाली प्रवरा में हुआ। उन्हें कम उम्र में ही अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी, और इसी दौरान वे समाज की विभिन्न समस्याओं से परिचित हुए। किसानों की पीड़ा को समझते हुए उनके मन में उनके प्रति संवेदना के बीज अंकुरित हुए। दुग्ध संघों, विभिन्न सहकारी संस्थाओं, चीनी मिलों और बैंकों जैसे अलग-अलग संगठनों के माध्यम से शुरू हुई उनके गतिशील नेतृत्व की यात्रा को वर्ष 1991 में एक नया आयाम मिला। इसके बाद वे सांसद, विधायक, विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के राज्य मंत्री तथा चार बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे अनेक पदों पर कार्य कर चुके थे। सत्ता में हों या न हों, श्री अजित पवार हमेशा जनता दरबारों के माध्यम से लोगों के संपर्क में रहते थे। उनके लिए पार्टी कार्यकर्ता और आम जनता में कोई भेद नहीं था।अजित दादा अपने सीधे-सपाट और स्पष्ट रवैये के लिए प्रसिद्ध हैं – “काम हो सकता है तो हाँ, अन्यथा नहीं।” जिन लोगों का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके प्रति उनकी जिम्मेदारी की भावना विधानसभा में पूछे गए उनके प्रश्नों और उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देती थी।
राज्य की भू-राजनीतिक परिस्थितियों की उनकी गहरी समझ के कारण वे जानते थे कि कोई भी निर्णय मंत्रालय, मुंबई से लेकर मेहनतकश किसानों तक और महाराष्ट्र के पूर्वी कोने से लेकर पश्चिमी कोने तक लोगों को किस प्रकार प्रभावित करेगा। महाराष्ट्र के लोगों के लिए उनकी अथक मेहनत और मिट्टी से जुड़े रहने की उनकी क्षमता के कारण श्री अजित पवार को मजदूरों से लेकर बच्चों, माताओं, बहनों और राज्य के युवाओं तक सभी स्नेह से “दादा” कहकर पुकारते थे।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने अजीत पवार जी की मृत्यु पर अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट करी हैं।
News By- नवनीत बंसल
