पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की आहट: मई–जून में खत्म हो रहा कार्यकाल, देश में बढ़ी सियासी सरगर्मी

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की आहट: मई–जून में खत्म हो रहा कार्यकाल, देश में बढ़ी सियासी सरगर्मी

(विशेष फीचर आर्टिकल, 12 मार्च – नवनीत बंसल एवं जसविंदर जुल्का, exclusive by न्यूजरूम 7) 2025 में दो राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। साल की शुरुआत में दिल्ली, तो साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव हुए। दिल्ली में भाजपा 27 साल बाद सत्ता में लौटी, तो बिहार में नीतीश कुमार का राज बरकरार रहा। नए साल की दस्तक के साथ विधानसभा चुनाव का दौर शुरू हो जाएगा। 2026 में ये चुनावी हलचल 2025 के मुकाबले ज्यादा रहेगी। 2026 में कहां-कहां और कब चुनाव होने वाले हैं? इन राज्यों में पिछले चुनावों में क्या हुआ था? फिलहाल वहां समीकरण कैसे हैं? आइये जानते हैं…

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव की तैयारी तेज; चुनाव आयोग जल्द कर सकता है कार्यक्रम की घोषणा

Desh के पांच महत्वपूर्ण राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी—में विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इन सभी विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून 2026 के बीच समाप्त हो रहा है, जिसके चलते चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, तमिलनाडु का 10 मई, असम का 20 मई, केरल का 23 मई और पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून 2026 को समाप्त होगा। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत इन राज्यों में उससे पहले चुनाव कराना अनिवार्य है।

चुनाव कार्यक्रम की जल्द घोषणा संभव
सूत्रों के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग मार्च के मध्य तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर सकता है। मतदान की प्रक्रिया अप्रैल महीने में अलग-अलग चरणों में कराए जाने की संभावना है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने और मतदान के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखा जाएगा, ताकि उम्मीदवारों को प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

पांचों राज्यों का राजनीतिक महत्व
इन चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह पांच बड़े और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रों में जनमत का संकेत देंगे।
पश्चिम बंगाल:
294 सीटों वाली विधानसभा में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच होने की संभावना है। पिछली बार 2021 में यहां आठ चरणों में मतदान हुआ था।

तमिलनाडु:
234 सीटों वाले इस राज्य में द्रविड़ राजनीति का दबदबा है। यहां सत्तारूढ़ डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके के साथ भाजपा और कांग्रेस भी अपनी रणनीति मजबूत कर रहे हैं।

असम:
पूर्वोत्तर के इस महत्वपूर्ण राज्य में भाजपा और उसके सहयोगी दलों का मजबूत प्रभाव है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं।

केरल:
यहां परंपरागत रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच सीधा मुकाबला रहता है। आगामी चुनाव में भाजपा भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
पुडुचेरी:
छोटी विधानसभा होने के बावजूद यह केंद्र शासित प्रदेश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां गठबंधन राजनीति का असर साफ दिखाई देता है और सीट बंटवारे को लेकर दलों के बीच बातचीत जारी है।

चुनाव आयोग की तैयारियां
चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों के तबादले, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक दलों की रणनीति
चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा से पहले ही विभिन्न दलों ने रैलियां, जनसभाएं और गठबंधन वार्ताएं शुरू कर दी हैं। कई राष्ट्रीय नेता भी चुनावी राज्यों के दौरे की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आने वाले हफ्तों में सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।

लोकतंत्र का बड़ा पर्व
पांच राज्यों में होने वाले ये चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की नजर भी इन चुनावों पर टिकी हुई है, विशेषता पंजाब में भी जहां फरबरी 2027 में भगवंत मान जी का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और आप सरकार की कुर्सी दावं पर लगी होगी

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